अप्रैल में लागू हो जाएगी लैंड पूलिंग पॉलिसी

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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की लैंड पूलिंग पॉलिसी अप्रैल माह के अंत तक लागू हो जाएगी। इस पॉलिसी को लाख लोगों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। पॉलिसी पर जनता से मिले सुझावों और आपत्तियों पर काम होने के बाद जल्द ही इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा। डीडीए के अनुसार जन आपत्तियों एवं सुझावों पर बोर्ड ऑफ हियरिंग की जन सुनवाई कुछ ही दिनों में पूरी कर ली जाएगी। बोर्ड ऑफ हियरिंग से रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर डीडीए की बोर्ड बैठक में चर्चा होगी और प्रस्ताव पास कर अधिसूचना के लिए अर्बन शहरी आवास एवं विकास मंत्रलय को भेज दिया जाएगा। 1पिछले साल दिसंबर ने इस पॉलिसी में तेजी लाने के लिए इस पॉलिसी का सरलीकरण किया गया था।

पॉलिसी में डीडीए सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएगा। 24 फरवरी तक लोगों ने इस पर आपत्तियां और सुझाव डीडीए को दिए हैं। बताया जाता है कि इस पॉलिसी पर डीडीए को सैकड़ों सुझाव मिले हैं। इनमें भी काफी आपत्तियां भी हैं जिनमें लोगों ने पर्यावरण एवं पार्किंग को मुख्य मुद्दा बनाया है।1पहले इस पॉलिसी के तहत लैंड पुल का ट्रांसफर डीडीए को होगा। डीडीए का इसका एक आधारभूत मॉडल तैयार करेगा। डीडीए के पास ही लैंड पुल की जमीन के प्लानिंग और ढांचागत विकास का जिम्मा होगा। लेकिन दिसंबर में हुई मीटिंग में निर्णय लिया गया कि लैंड टाइटल असली लैंड मूल मालिक के पास ही रहेगी। डीडीए ने इसके लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था की भी तैयारी की है ताकि ऐसे मामलों में स्वीकृति का काम तेजी से हो सके।

लैंड पुलिंग पॉलिसी के महज पांच जोन के ग्रीनफील्ड एरिया कवर होते हैं जिनमें जे, के-1, एल, एन और पी-2 शामिल हैं। यह सभी मास्टर प्लान-2021 में आते हैं। इस पॉलिसी में एफएआर को से बढ़ाकर 400 तक करने की मंजूरी होगी। अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 15 फीसद अतिरिक्त एफएआर की भी मंजूरी होगी। पॉलिसी के महत 22,000 हेक्टेयर जमीन के पुल होने के संभावना है जो लाख लोगों की जरूरतों को पूरा करेगी। ढांचागत विकास के बाद इस पॉलिसी के महत 60 फीसद जमीन इसके मूल मालिक को वापस कर दी जाएगी। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बनने वाले अफोर्डेबल हाउस का साइज 32 से 40 वर्ग मीटर होगा। इस पॉलिसी के तहत बनने वाले घरों का आधा स्टॉक उन्हें बनाने वाले के पास ही रहेगा जबकि आधा अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए डीडीए के पास रहेगा।

इसे डीडीए लागत मूल्य पर जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध करवाएगी।हालांकि विशेषज्ञ इस पॉलिसी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मकान बनाने वाले को 60 फीसद जमीन किस आधार पर वापस की जाएगी। लोगों को इन जगहों पर लास्ट माइल कनेक्टविटी कैसे मिलेगी।1डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जनसुनवाई में मिली आपत्तियों और सुझाव पर काम अंतिम चरण में हैं। इसके बाद बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी के लिए लोगों को बुलाया जाएगा। रिपोर्ट तैयार करके डीडीए बोर्ड को सौंप दी जाएगी।

Source From: http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/19-mar-2018-edition-Delhi-City-page_5-16071-8314-4.html

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